Gulzar/गुलजार
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गुलजार
जन्म : 1936 दीना, पाकिस्तान में।

मशहूर : अपने गीतों, नज्मों और कहानियों के लिए ख्याति पाई।

गुलज़ार ने फिल्म क्षेत्र में पहले-पहल जब पांव रखा तो सहायक निर्देशक के रूप में बिमल राय के साथ काम किया। फिर कोमल, सफल, सार्थक गीत लिखे,—गीतों के बाद सफल पटकथाएं तथा कथाएं लिखीं, जिनका असर बंबइया फिल्मों की दुनिया में एक ताजी हवा की तरह पड़ा, अन्त में गुलजार ने फिल्मों का निर्देशन शुरू किया और एकदम प्यारी, एकदम भिन्न, साहित्य में शरत चन्द्र की-सी संवेदनात्मक मार्मिक, सहानुभूति और करुणा से ओत-प्रोत, घिसी-पिटी लीक से हटकर, फिल्में बनाईं। बजाय इसके कि यहाँ की चकाचौंध उन पर हावी होती—गीतकार, संवाद-लेखक और निर्देशक गुलज़ार की संवेदनशीलता फ़िल्मी दुनिया पर छा गई। गुलज़ार ने करीब पचास फिल्मों की पटकथाएं लिखी हैं, कई विशिष्ट फ़िल्मों का निर्देशन किया है। गुलज़ार निर्देशित कुछ फिल्में हैं—मेरे अपने, अचानक, परिचय, आंधी, मौसम, ख़ुशबू, मीरा, किनारा, नमकीन, लेकिन, लिबास और माचिस।

पंज़ाब की पृष्ठभूमि पर बनाई गई, बेहद चर्चित माचिस की विषयवस्तु और निर्देशन ने उनके रचनाकार का एक और पक्ष उजागर किया। उन्हें कई पुरस्कार मिले। उन्होंने बच्चों के लिए अद्भुत रचनाएँ कीं तथा दो दूरदर्शन धारावाहिक किरदार और मिर्ज़ा ग़ालिब भी बनाए। कविता, कहानी, फिल्म-गीत और निर्देशन का यह सिलसिला उनकी अपनी अनूठी रफ्तार से जारी है।

कहानियाँ : चौरस रात, रावी पार।

कविताएँ : कुछ और नज़्में, साइलेंसेस, पुखराज, चाँद पुखराज का, ऑटम मून, त्रिवेणी।

फिल्मी गीतों का संग्रह : मेरा कुछ सामान, छैंया-छैंया।

अल्बम : सनसेट प्वॉइंट, विसाल, वादा, बूढ़े पहाड़ों पर, मरासिम, फ़िज़ा, फ़िलहाल।

रंगमंच : ख़राशें, आँधी, ख़ुशबू, लिबास, मीरा।

बाल साहित्य : बोसकी का पंचतंत्र (पाँच भाग), इक चूरन सम्पूरन, झूठ के जल गए दोनों पाँव, ‘गधा, उफ बड़ा ही गधा है’, हाथ लगी हलवे की हांडी, टुकड़े-टुकड़े जोड़ के, बोसकी के कप्तान चाचा, बोसकी का कौआनामा, बोसकी की गिनती, बोसकी की गप्पें, बोसकी के ब्रम्हन, बोसकी के धनवान, बोसकी।
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