Ramdhari Singh Dinkar/रामधारी सिंह दिनकर
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रामधारी सिंह दिनकर
जन्म : 23 सितंबर, 1908।

मृत्यु : 25 अप्रैल, 1974।

दिनकर जी का जन्म बिहार के मुंगेर जिले के सिमरिया घाट नामक गाँव में हुआ था। इनकी शिक्षा मोकामा घाट के स्कूल तथा फिर पटना कॉलेज में हुए जहाँ से उन्होंने इतिहास विषय लेकर बी.ए. (आनर्स) की परीक्षा उत्तीर्ण की। एक विद्यालय के प्रधानाचार्य, सब-रजिस्ट्रार, जनसम्पर्क के उप-निदेशक, भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति, भारत सरकार के हिंदी सलाहकार आदि विभिन्न पदों पर रहकर उन्होंने अपनी प्रशासनिक योग्यता का परिचय दिया। साहित्य-सेवाओं के लिए उन्हें विश्वविद्यालय ने डी.लिट. की मानद उपाधि, विभिन्न संस्थाओं ने उनकी पुस्तकों पर पुरस्कार (साहित्य अकादमी तथा ज्ञानपीठ) और भारत सरकार ने पद्मभूषण की उपाधि प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।

भाषा ज्ञान : संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला आदि।

निबन्ध : संकलित निबन्ध।

काव्य : प्रणभंग (1929)। रेणुका (1935)। हुंकार (1938)। रसवन्ती (1939)। द्वन्द्वगीत (1940)। कुरुक्षेत्र (1946)। सामधेनी (1947)। बापू (1947)। धूप-छाँह (1947)। इतिहास के आँसू (1951)। धूप और धुआँ (1951)। मिर्च और मजा (1951)। रश्मिरथी (1952)। दिल्ली (1954)। नीम के पत्ते (1954)। सूरज का ब्याह (1955)। नील कुसुम (1955)। चक्रवाल (1956)। कविश्री (1957)। सीपी और शंख (1957)। नये सुभाषित (1957)। लोकप्रिय कवि दिनकर (1960)। उर्वशी (1961)। परशुराम की प्रतीक्षा (1963)। कोयला और कवित्व (1964)। मृत्ति तिलक (1964)। दिनकर की सूक्तियाँ (1964)। आत्मा की आँखें (1964)। हारे को हरिनाम (1970)। दिनकर के गीत (1973)।

अन्य गद्य रचनाएँ : मिट्टी की ओर (1946)। चित्तौड़ का साका (1948) अर्धनारीश्वर (1952)। रेती के फूल (1954)। हमारी सांस्कृतिक एकता (1955)। भारत की सांस्कृतिक कहानी (1955) उजली आग (1956)। संस्कृति के चार अध्याय (1956)। काव्य की भूमिका (1958)। पन्त, प्रसाद और मैथिलीशरण (1958)। वेनु वन (1958)। धर्म, नैतिकता और विज्ञान (1959)। वट-पीपल (1961)। लोकदेव नेहरू (1965)। शुद्ध कविता की खोज (1966)। साहित्यमुखी (1968)। हे राम! (1968)। संस्मरण और श्रद्धांजलियाँ (1970)। मेरी यात्राएँ (1971)। भारतीय एकता (1971)। दिनकर की डायरी (1973)। चेतना की शिला (1973)। विवाह की मुसीबतें (1973)। आधुनिक बोध (1973)।

प्रस्तुत विवरण निम्न पुस्तकों से लिया गया है (परशुराम की प्रतीक्षा, संचयिता।)

उर्वशी

रामधारी सिंह दिनकर

राजा विक्रमादित्य और अप्सरा उर्वशी की प्रणय गाथा   आगे...

रश्मिरथी

रामधारी सिंह दिनकर

रश्मिरथी का अर्थ होता है वह व्यक्ति, जिसका रथ रश्मि अर्थात सूर्य की किरणों का हो। इस काव्य में रश्मिरथी नाम कर्ण का है क्योंकि उसका चरित्र सूर्य के समान प्रकाशमान है

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