एकाग्रता का रहस्य - स्वामी विवेकानन्द Ekagrata Ka Rahasya - Hindi book by - Swami Vivekanand
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एकाग्रता का रहस्य

स्वामी विवेकानन्द

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पृष्ठ :31 पुस्तक क्रमांक : 9561

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एकाग्रता ही सभी प्रकार के ज्ञान की नींव है, इसके बिना कुछ भी करना सम्भव नहीं है।

एकाग्रता का रहस्य

 

 

एकाग्रता ही सभी प्रकार के ज्ञान की नींव है, इसके बिना कुछ भी करना सम्भव नहीं है। ज्ञानार्जन के लिए किस प्रकार मन को एकाग्र करना चाहिए इसका दिग्दर्शन इस पुस्तिका में किया गया है।

एकाग्र मन एक सर्च लाइट के समान है। सर्चलाइट हमें दूर तथा अँधेरे कोनों में पड़ी वस्तुओं को भी देखने में समर्थ बनाता है।

एकाग्रता में ही सफलता का रहस्य निहित है – इस बात को समझ लेने वाले सचमुच ही बुद्धिमान हैं। एकाग्रता को केवल योगियों के लिए ही आवश्यक समझना एक बड़ी भूल है। एकाग्रता प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है, भले ही वह किसी भी कार्य में क्यों न लगा हो। देखने में आता है कि लौहकारों, नाइयों, स्वर्णकारों तथा जुलाहों में सहज रूप से ही एकाग्रता विकसित हो जाती है।

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