लोगों की राय

उपन्यास >> नास्तिक

नास्तिक

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :433
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 7596

Like this Hindi book 5 पाठकों को प्रिय

391 पाठक हैं

खुद को आस्तिक समझने वाले कितने नास्तिक हैं यह इस उपन्यास में बड़े ही रोचक ढंग से दर्शाया गया है...


‘‘यही तो मैंने लिखा था। लिखित बयान में तो सिर्फ इशारा किया था, मगर मैं यह तब बतानेवाली थी, जब उनका वकील इस विषय में मुझसे जिरह करता।’’

‘‘मैं यह नहीं पूछ रहा। मैं तो यह पूछ रहा हूँ कि अम्मी को यह सब-कुछ बताने से क्या मतलब था?’’

‘‘हाँ दादा! यह भूल हो गई है। कहो तो जाकर उनके पाँव पकड़ मुआफी माँग लूँ।’’

‘‘नहीं, अभी बैठो। भोजन कर लो। अपना पेट भर लो। भरे पेट से बात ठीक ढंग से हो सकेगी।’’

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book