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उपन्यास >> सुमति

सुमति

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :265
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 7598

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बुद्धि ऐसा यंत्र है जो मनुष्य को उन समस्याओं को सुलझाने के लिए मिला है, जिनमें प्रमाण और अनुभव नहीं होता।


कल्याणी इसे ठीक-ठीक नहीं समझ सकी। किन्तु निष्ठा समझ गई थी। पर उसने कुछ कहा नहीं। कल्याणी ने सुमति को स्थिति से अवगत कराते हुए कहा, ‘‘सुदर्शन का एक विद्यार्थी है। अमेरिका से उसने केमिकल इंजीनियरिंग की परीक्षा उत्तीर्ण की है और सरकार के सिन्दरी केमिकल वर्क्स में नौकर हो गया है। कुछ दिन पूर्व उसने संगीत समारोह में निष्ठा को देखा तो इसके संगीत और रूप-लावण्य पर मुग्ध हो इसका पता लगाया और सुदर्शन से जा मिला। सुदर्शन ने दो-तीन दिन में बात करने को कहकर उसकी जाँच-पड़ताल की है।’’

‘‘वह सरकारी प्रकाशन-विभाग के सुपरवाइज़र का पुत्र है, पिता अच्छा सम्पन्न है। श्रीराम रोड पर साठ हज़ार की लागत से एक कोठी बनवाई हुई है। अपने लड़के की शिक्षा पर भी चालीस हज़ार से अधिक व्यय किया है। लड़के का वेतन दो हज़ार रुपया मासिक है। लड़का देखने में स्वस्थ, सुन्दर और सभ्य प्रतीत होता है।’’

‘‘मैंने रात निष्ठा से पूछा था कि यह भी लड़के को देखना चाहेगी? क्योंकि मैं और तुम आज उसे देखने जाने वाले हैं।’’

सुमति कुछ नहीं बोली। निष्ठा ने कहा, ‘‘माँ! जब तुम और भाभी जा रही हैं तो मेरे जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।’’

‘‘किन्तु जाने में कोई हानि भी तो नहीं हैं।’’

‘‘यह मैं नहीं कह सकती। हाँ, भविष्यवाणी करने की सामर्थ्य मुझसे नहीं हैं। आप लोग जाइए और जो आप लोगों की सम्मति होगी, मुझे वह स्वीकारर्य होगी।’’

बात का निश्चय हो गया।

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