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उपन्यास >> सुमति

सुमति

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :265
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 7598

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बुद्धि ऐसा यंत्र है जो मनुष्य को उन समस्याओं को सुलझाने के लिए मिला है, जिनमें प्रमाण और अनुभव नहीं होता।


सुमति नलिनी के मुख पर घबराहट के लक्षण देख उसके मन के भावों का अनुमान लगाने लगी। अतः लपककर नलिनी के पास पहुँचते हुए उसने कहा, ‘‘तो ये हैं तुम्हारे आफिसर?’’

नलिनी सुमति को पृथक् ले जाकर पूछने लगीं, ‘‘माताजी तथा डॉक्टर साहब इस विषय में क्या जानते हैं?’’

‘‘उतना ही जितना तुम्हारे नागपुर से आने के समय जानते थे।’’

‘‘सत्य?’’

‘‘मैंने कभी किसी के साथ विश्वासघात नहीं किया। नलिनी । यह तुम्हारी करनी है तुम ही जानो। मेरा अथवा अन्य किसी का इससे कोई सम्बन्ध नहीं है।’’

इससे आश्वस्त हो नलिनी उधर को लौटी जिधर मिस्टर ओझा और उसके पुत्र का कल्याणी से परिचय कराया जा रहा था।

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