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उपन्यास >> प्रगतिशील

प्रगतिशील

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :258
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 8573

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इस लघु उपन्यास में आचार-संहिता पर प्रगतिशीलता के आघात की ही झलक है।


दिल्ली पहुंचने के कुछ दिनों बाद उसका महेश्वरी से विवाह भी हो गया। मिस इलियट मदन के दरियागंज वाले मकान में दो कमरे किराये पर लेकर रहने लगी थी। उसने एक मोटर खरीद ली थी और प्रायः नित्य ही मदन से मिलने के लिए लोदी रोड जाया करती थी।

विवाह हुए एक वर्ष हो चुका था। लैसली का इस अवधि में कोई समाचार नहीं आया। यह भी पता नहीं चला कि उसके लड़का हुआ अथवा लड़की।

मदन ने एक पत्र लिखा तो उसके उत्तर में उसे सूचना मिली कि उसके लड़का हुआ है। वह अभी बहुत छोटा है। जब वह इतनी लम्बी यात्रा के योग्य हो जायेगा तो वह उसको सूचित कर देगी।

इसी प्रकार छः मास और व्यतीत हो गए। पुनः लैसली को एक पत्र लिखा गया। उत्तर में उसने लिखा, ‘‘लड़के का नाम सैमुएल रखा है। वह अब मुझसे इतना हिल-मिल गया है कि मुझसे पृथक् होना पसन्द नहीं करता। उसको कुछ और बड़ा हो जाने दीजिए।’’

मदन को दिल्ली आए दो वर्ष हो गए थे। लैसली ने बच्चे का चित्र भेजा। लड़के का रूप सर्वथा मदन से मिलता था। चित्र के साथ लैसली ने पत्र में लिखा, ‘‘डेढ़ वर्ष के विचार के अनन्तर मैंने निश्चय किया है कि बच्चा मेरे पास ही रहेगा। मैं उससे बिछुड़ नही सकती।’’

इधर महेश्वरी के भी लड़का हुआ। इसका चित्र महेश्वरी ने लैसली को भेजा तो वहां से पत्र आया कि उसने अभी तक विवाह नहीं किया।

मदन ने पुनः एक संक्षिप्त पत्र में उसको सुझाव दिया कि वह दूसरा विवाह कर ले और विवाह में यदि लड़का बाधा बनता हो तो उसे हिन्दुस्तान भेज दे।

उसके उत्तर में लैसली ने लिखा कि उसका विचार बदल रहा है। वह वड़के से प्रेम करती है। उसने यह भी लिखा कि उसने अब जीवन-भर अन्यत्र विवाह न करने का निश्चय किया है। अपनी भूलों पर पश्चात्ताप करती हुई वह अविशिष्ट जीवन यों ही व्यतीत कर देगी।

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