Raakh Aur Angare - Hindi book by - Gulshan Nanda - राख और अंगारे - गुलशन नन्दा
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उपन्यास >> राख और अंगारे

राख और अंगारे

गुलशन नन्दा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :226
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9598

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मेरी भी एक बेटी थी। उसे जवानी में एक व्यक्ति से प्रेम हो गया।

‘मेरी भी एक बेटी थी। उसे जवानी में एक आवारा व्यक्ति से प्रेम हो गया। मेरे लाख समझाने पर भी वह बाज न आई और एक दिन वह उसके साथ भाग गई परन्तु उस आवारा ने उससे विवाह नहीं किया और उसे नर्तकी बनाकर बीच मझदार में छोड़ दिया और स्वयं उसकी कमाई पर ऐश करता रहा-'

-इसी उपन्यास में से

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