शब्द का अर्थ
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दुर् :
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उप० [सं०√दु (पीड़ित करना)+रुक् या सुक्] १. एक संस्कृत उपसर्ग जिसका प्रयोग शब्दों के आरम्भ में नीचे लिखे अर्थ या भाव सूचित करने के लिए होता है—(क) अनुचित, दूषित या बुरा। जैसे—दुरात्मा, दुर्जन, दुर्भाव। (ख) जो सहज में न हो सके अर्थात, कठिन या कष्ट-साध्य। जैसे—दुर्गम, दुर्बोध, दुर्वह। (ग) अभावपूर्ण। जैसे—दुर्बल। |
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दुर्कुल :
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पुं०=दुष्कुल। |
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दुर्गंध :
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स्त्री० [सं० दुर्-गंध प्रा० स०] १. बुरी गंध या महक। बदबू। २. लोक में, किसी बुराई का होनेवाला प्रसार। पुं० [ प्रा० ब० स०] १. आम का पेड़। २. प्याज ३. काला नमक। |
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दुर्गंधता :
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स्त्री० [सं० दुर्गंध+तल्—टाप्] १. वह अवस्था जिसमें किसी वस्तु में से बदबू निकल रही हो। २. वह तत्त्व जिसके कारण दुर्गंध फैलती हो। |
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दुर्ग :
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वि० [सं० दुर्√गम् (जाना)+ड](स्थान) जहाँ तक पहुँचना बहुत कठिन हो। दुर्गम। पुं० १. दु्र्गम पथ। २. बहुत बड़ा किला (विशेषतः किसी पहाड़ी पर स्थित) ३. एक प्रसिद्ध राक्षस जिसका वध दुर्गा ने किया था। |
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दुर्ग-कर्म (न्) :
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पुं० [ष० त०] दुर्ग बनाने का काम। |
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दुर्ग-कारक :
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पुं० [ष० त०] १. दुर्ग बनानेवाला कारीगर। २. एक तरह का वृक्ष। |
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दुर्ग-कोपक :
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पुं० [स० त०] किले में बगावत फैलानेवाला विद्रोही। |
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दुर्गच्छा :
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स्त्री० [सं०] एक प्रकार का मोहनीय कर्म जिसके उदय से मलिन पदार्थों में ग्लानि उत्पन्न होती है। (जैन) |
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दुर्गत :
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वि० [ सं० दुर्√गम्+क्त] १. जिसकी दुर्गति हुई हो। २. गरीब। दरिद्र। स्त्री०=दुर्गति।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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दुर्ग-तरणी :
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स्त्री० [ष० त०] १. एक देवी का नाम। २. सावित्री। |
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दुर्गति :
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स्त्री० [सं० दुर्√गम्+क्तिन्] १. दुर्गम होने की अवस्था या भाव। २. दुर्दशाग्रस्त होने की अवस्था या भाव। ३. दुर्दशाग्रस्त करने की क्रिया या भाव। |
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दुर्ग-पाल :
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पुं० [सं० दुर्ग√पाल् (रक्षा)+णिच्+अण्] दुर्ग अर्थात् किले का प्रधान अधिकारी और रक्षक। किलेदार। |
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दुर्ग-पुष्पी :
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पुं० [ब० स०, ङीष्] एक तरह का वृक्ष। |
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दुर्गम :
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वि० [सं० दुर्√गम्+खल्] [भाव० दुर्गमता] १. जिसमें गमन करना अर्थात् जाना, चलना या आगे बढ़ना बहुत कठिन हो। २. जिसे जानना या समझना कठिन हो। दुर्बोध। ३. कठिन। विकट। पुं० १. दुर्ग। किला। गढ़। २. जंगल। वन। ३. संकटपूर्ण स्थान या स्थिति। ४. विष्णु का एक नाम। ५. एक असुर का नाम। |
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दुर्गमता :
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स्त्री० [सं० दुर्गम+तल्—टाप्] दुर्गम होने की अवस्था, गुण या भाव। |
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दुर्गमनीय :
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वि० [सं० दुर्√गम्+अनीयर्] दुर्गम। |
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दुर्ग-रक्षक :
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पुं० [ष० त०] दुर्गपाल। किलेदार। |
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दुर्ग-लंघन :
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पुं० [ष० त०] (रेतीले दुर्गम पथ को पार करनेवाला) ऊँट। |
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दुर्गल :
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पुं० [सं०] एक प्राचीन देश। |
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दुर्ग-संचर :
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पुं० [ष० त०] वह जिसके द्वारा या माध्यम से दुर्गम पथ पार किया जाय। जैसे—पुल, बेड़ा, सीढ़ी इत्यादि। |
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दुर्गा :
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पुं० [सं० दुर्ग+टाप्] १. आदि शक्ति के रूप में मानी जानेवाली एक प्रसिद्ध देवी जिसका यह नाम दुर्ग राक्षस का वध करने के कारण पड़ा था। २. नौ वर्षों की अवस्थावाली कन्या। ३. नील का पौधा। ४. अपराजिता। ५. श्यामा पक्षी। ६. गौरी, मालश्री, सारंग और लीलावती के योग से बनी हुई एक संकर रागिनी। |
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दुर्गा-कल्याण :
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पुं० [सं०] ओडव संपूर्ण जाति का एक राग जो रात के पहले पहर में गाया जाता है। |
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दुर्बाढ, दुर्गाध :
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वि० [सं० दुर्√गाह् (थाह लेना)+क्त दुर्-गाध प्रा० ब० स०] जिसकी थाह कठिनता से मिल सके। |
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दुर्गाधिकारी (रिन्) :
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पुं० [सं० दुर्ग-अधिकारिन् ष० त०] [स्त्री० दुर्गाधिकारिणी] दुर्ग का प्रधान अधिकारी। किलेदार। |
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दुर्गा-नवमी :
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स्त्री० [मध्य० स०] १. कार्तिक शुक्ल नवमी जिस दिन दुर्गा के पूजन का विधान है। २. चैत्र शुक्ल नवमी। ३. आश्वनी शुक्ल नवमी। |
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दुर्गापाश्रया भूमि :
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स्त्री० [सं० दुर्ग-अपाश्रया ष० त०, दुर्गापाश्रया भूमि व्यस्त पद] वह भूमि जिसमें अनेक किले हों। |
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दुर्गा-पूजा :
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स्त्री० [ष० त०] १. दु्र्गा का पूजन। २. चैत्र और आश्विन के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक के नौ दिन जिनमें लोग दुर्गा या देवी की प्रतिमा स्थापित करके उसका पूजन करते हैं। |
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दुर्गाष्टमी :
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स्त्री० [दुर्गा-अष्टमी मध्य० स०] १. आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी। २. चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी। |
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दुर्गाह्य :
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वि० [सं० दुर्√गाह्+ण्यत्] जिसका अवगाहन करना बहुत कठिन हो। |
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दुर्गाह्व :
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पुं० [सं० दुर्गा-आ ह्वा ब० स०] भूमि गूगल। |
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दुर्गुण :
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पुं० [सं० दुर्-गुण प्रा० स०] १. व्यक्ति में होनेवाली ऐसी दूषित स्वभावजन्य क्रियाशीलता जिसके कारण वह बुरे कामों में प्रवृत्त होता है। ऐब। २. किसी पदार्थ में होनेवाला ऐसा दोष जिससे विकार उत्पन्न होता हो। |
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दुर्गुणी (णिन्) :
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वि० [सं० दुर्गुण+इनि] जिसमें दुर्गुण या ऐब हों। |
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दुर्गेश :
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पुं० [सं० दुर्ग-ईश ष० त०] १. दुर्ग का स्वामी। २. दुर्ग का प्रधान अधिकारी। |
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दुर्गोत्सव :
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पुं० [सं० दुर्गा-उत्सव मध्य० स०] चैत्र तथा आश्विन के नवरात्रों में मनाया जानेवाला उत्सव जिसमें दुर्गा का पूजन किया जाता है। |
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दुर्ग्रह :
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वि० [सं० दुर्√ग्रह (पकड़ना)+खल्] १. जिसे कठिनता से पकड़ा अर्थात् अधिकार में किया जा सके। २. कठिनता से समझ में आनेवाला। दुर्बोध। पुं० १. अपामार्ग। चिचड़ा। २. [दुर्-ग्रह प्रा० स०] बुरा या अनिष्टकारक ग्रह। |
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दुर्ग्राह्य :
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वि० [सं० दुर्√ह+ण्यत्] दुर्ग्रह। |
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दुर्घट :
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वि० [सं० दुर्√घट् (घटित होना)+खल्] जिसका घटित होना प्रायः असंभव हो। बहुत कठिनता से घटित होनेवाला। |
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दुर्घटना :
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स्त्री० [सं० दुर्-घटना प्रा० स०] १. ऐसी घटना जिसके फलस्वरूप किसी व्यक्ति अथवा वस्तु को क्षति या हानि पहुँचे। २. आफत। विपत्ति। |
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दुर्घोष :
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वि० [सं० दुर्-घोष प्रा० ब० स०] जो बुरा स्वर निकाले। कटु, कर्कश या बुरा घोष अथवा शब्द करनेवाला। पुं० भालू। रीछ। |
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दुर्जन :
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पुं० [सं० दुर्-जन प्रा० स०] [भाव० दुर्जनता] वह व्यक्ति जो दूसरों का अपकार, अपकीर्ति या हानि करता रहता हो। खराब या बुरा आदमी। |
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दुर्जनता :
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स्त्री० [सं० दुर्जन+तल्—टाप्] दुर्जन होने की अवस्था या भाव। |
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दुर्जय :
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वि० [सं० दुर्-जय प्रा० ब० स०] जिस पर विजय पाना बहुत कठिन हो। पुं० १. विष्णु का एक नाम। २. एक राक्षस का नाम। |
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दुर्जय-व्यूह :
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पुं० [कर्म० स०] एक प्रकार का व्यूह जिसमें सेना चार पंक्तियों में खड़ी की जाती थी। (कौ०) |
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दुर्जर :
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वि० [सं० दुर्√जृ (जीर्ण होना)+अच्] १. जो सदा तरुण या युवा बना रहे। २. (अन्न) जिसे सरलता से न पचाया जा सके। |
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दुर्जरा :
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स्त्री० [सं० दुर्जर+टाप्] ज्योतिष्मती लता। मालकँगनी। |
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दुर्जात :
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वि० [सं० दुर्-जात प्रा० स०] १. जिसका जन्म बुरी रीत से हुआ हो। जैसे—दोगला या वर्णसंकर। २. जिसका जन्म व्यर्थ हुआ हो। ३. नीच। कमीना। ४. अभागा। बद-किस्मत। पुं० १. व्यसन। २. विपत्ति। संकट। ३. असमंजस। दुविधा। ४. अनौचित्य। |
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दुर्जाति :
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स्त्री० [सं० दुर्-जाति प्रा० स०] बुरी जाति। नीच जाति। वि० १. बुरी जाति या कुल का। २. जिसकी जातीयता बिगड़ गई या नष्ट हो चुकी हो। |
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दुर्जीव :
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वि० [सं० दुर्-जीव प्रा० ब० स०] १. दूसरे के दिये हुए अन्न पर पलनेवाला। २. बुरी तरह से जीविका उपार्जित करनेवाला। पुं० [प्रा० स०] निंदनीय या बुरा जीवन। |
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दुर्जेय :
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वि० [सं० दुर्√जी (जीतना)+अच्] दुर्जय। |
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दुर्ज्ञेय :
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वि० [सं० दुर्√ज्ञा (जानना)+यत्] १. जिसे जानना बहुत कठिन हो। जो जल्दी समझ में न आ सके। दुर्बोध। |
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दुर्दम :
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वि० [सं० दुर्√दम् (दमन करना)+खल्] १. जिसका दमन करना बहुत कठिन हो। २. प्रचंड। प्रबल। पुं० वसुदेव के एक पुत्र का नाम जो रोहिणी के गर्भ से उत्पन्न हुआ था। |
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दुर्दमन :
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पुं० [सं० दुर्-दमन प्रा० ब० स०] जनमेजय के वंश में उत्पन्न शतानीक राजा का पुत्र। वि०=दुर्दम। |
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दुर्दमनीय :
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वि० [सं० दुर्√दम्+अनीयर्] १. जिसका दमन करना बहुत कठिन हो। दुर्दम। २. प्रचंड। प्रबल। |
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दुर्दम्य :
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वि० [सं० दुर्√दम्+यत्] दुर्दम। पुं० [सं०] गाय का बछड़ा। |
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दुर्दर :
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वि०=दुर्धर।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है) |
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दुर्दर्श :
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वि० [सं० दुर्√र्दृश् (देखना)+खल्] १. जिसका दर्शन करना या होना अत्यंत कठिन हो। २. जिसे देखने से डर लगे या घृणा हो। ३. देखने में खराब या बुरा। कुरूप। भद्दा। ४. जिसे देखने से कोई बुरा परिणाम या फल होता हो। |
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दुर्दर्शन :
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वि० [सं० दुर्—दर्शन प्रा० ब० स०] दुर्दर्श। पुं० [सं०] कौरवों का एक सेनापति। |
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दुर्दशा :
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स्त्री० [सं० दुर्-दशा प्रा० स०] बुरी और हीन दशा। खराब हालत। |
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दुर्दांत :
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वि० [सं० दुर्√दम्+क्त] १. जिसका दमन या वश में करना कठिन हो। दुर्दमनीय। २. प्रचंड। प्रबल। पुं० १. शिव का एक नाम। २. गौ का बछड़ा। ३. लड़ाई-झगड़ा। कलह। |
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दुर्दान :
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पुं० [?] चाँदी। (अनेकार्थ) |
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दुर्दिन :
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पुं० [सं० दुर्—दिन प्रा० स०] १. खराब या बुरा दिन। २. दुर्दशा के दिन या समय। ३. ऐसा दिन जिसमें प्रातःकाल से ही खूब बादल घिरे हों। पानी बरसता हो और कहीं आना-जाना कठिन हो। |
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दुर्दु रूढ़ :
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पुं० [सं०√दुल् (फेंकना)+ऊढ़ पृषो० सिद्धि] नास्तिक। |
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दुर्देंव :
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पुं० [सं० दुर्-दैव प्रा० स०] १. दुर्भाग्य। अभाग्य। बुरी किस्मत। २. बुरे दिन। बुरा समय। |
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दुर्द्धर :
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वि० [सं० दुर्√धृ (धारण)+खल्] १. जिसे कठिनता से पकड़ सकें। जो जल्दी पकड़ में न आ सके। २. प्रचंड। प्रबल। ३. जल्दी समझ में न आनेवाला। दुर्बोध। पुं० १. पारा। २. भिलावाँ। ३. एक नरक का नाम। ४. महिषासुर का एक सेनापति। ५. शंबरासुर का एक मंत्री। ६. धृतराष्ट्र का एक पुत्र। ७. रावण की सेना का एक राक्षस जो हनुमान् को पकड़ने के लिए अशोक-वाटिका में भेजा गया था और वहीं उनके हाथ से मारा गया था। ८. विष्णु का एक नाम। |
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दुर्द्धर्ष :
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वि० [सं० दुर्√धृष् (दबाना)+खल्] १. जिसका दमन करना कठिन हो। जिसे जल्दी दबाया या वश में न किया जा सके। २. जिसे परास्त करना या हराना कठिन हो। ३. प्रचंड। प्रबल। पुं० १. धृतराष्ट्र के एक पुत्र का नाम। २. रावण की सेना का एक राक्षस। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्द्धर्षा :
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स्त्री० [सं० दुर्द्धर्ष+टाप्] १. नागदौना। २. कथारी नाम का पेड़। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्द्धी :
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वि० [सं० दुर्-धी प्रा० ब० स०] १. बुरी बुद्धिवाला। २. मंद बुद्धिवाला। स्त्री० बुरी बुद्धि। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्द्धुरूढ़ :
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पुं० [सं० दुर्+धुर्व् (हिंसा)+डट्, पृषो० सिद्धि] वह शिष्य जो गुरु की आज्ञा का पालन सहज में न करता हो। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्द्रिता :
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स्त्री० [सं०] एक प्रकार की लता। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्द्रुम :
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पुं० [सं० दुर्-द्रुम प्रा० स०] हरित्यपलांडु। हरा प्याज। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्धर :
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वि० [सं० दुर्√धृ (धारण)+खल्] १. जिसे धारण करना कठिन हो। २. प्रचंड। विकट। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्धर्ष :
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वि०=दुर्द्धर्ष। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्नय :
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पुं० [सं० दुर्=नी (ले जाना)+अच्] १. निकृष्ट या बुरा आचरण। खराब चाल-चलन। २. अनीति। अनैतिकता। ३. अन्याय। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्नाद :
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वि० [सं० दुर्-नाद प्रा० ब० स०] १. बुरे नाद या स्वरवाला। २. कर्कश ध्वनिवाला। पुं० राक्षस। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्नाम (न्) :
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वि० [सं० दुर्-नामन् प्रा० ब० स०] १. बुरे नामवाला। २. बदनाम। पुं० [प्रा० स०] १. बुरा नाम। कुख्याति। बदनामी। २. गाली। दुर्वचन। ३. [प्रा० ब० स०] बवासीर नामक रोग। ४. शुक्ति। सीपी। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्नामक :
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पुं० [सं० दुर्-नामन् प्रा० ब० स०, कप्] अर्श रोग। बवासीर। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्नामारि :
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पुं० [सं० दुर्नामन्-अरि ष० त०] (बवासीर को दूर करनेवाला) सूरन। जिमीकंद। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्नाम्नी :
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स्त्री० [सं० दुर-नाम् प्रा० ब० स०, ङीप्] शुक्ति। सीप। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्निग्रह :
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वि० [सं० दुर्-नि√ग्रह् (पकड़ना)+खल्] जिसे वश में करना बहुत कठिन हो। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्निमित्त :
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पुं० [सं० दुर्-निमित्त प्रा० स] अपशकुन। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्निरीक्ष :
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वि० [सं० दुर्-निर्√ईक्ष (देखना)+खल्] १. जिसे देखना या देखते रहना बहुत कठिन हो। २. भयंकर। भीषण। ३. कुरूप। भद्दा। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्निवार :
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वि० [सं० दुर्-नि√वृ (वारण)+घञ्]=दुर्निवार्य। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्निवार्य :
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वि० [सं० दुर्-नि√वृ+ण्यत्] १. जिसका निवारण कठिनता से होता हो। जो जल्दी रोका न जा सके। २. जिसे जल्दी दूर दिया या हटाया न जा सके। ३. जिसका घटित होना प्रायः निश्चित हो। जो जल्दी टल न सके। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्नीत :
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वि० [सं० दुर्√नी+क्त] नीति विरुद्ध आचरण करनेवाला। स्त्री०=दुर्नीति।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्नीति :
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स्त्री० [सं० दुर्-नीति प्रा० स०] १. निंदनीय और बुरी नीति। २. नीति विरुद्ध आचरण। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्बल :
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वि० [सं० दुर्-बल प्रा० ब० स०] [भाव० दुर्बलता] १. जिसमें शारीरिक शक्ति की कमी हो। कमजोर। २. दुबला-पतला। कृश। ३. जो मानसिक, नैतिक आदि शक्तियों से रहित हो। जैसे—दुर्बल चरित्र। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्बलता :
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स्त्री० [सं० दुर्बल+तल्—टाप्] १. दुर्बल होने की अवस्था या भाव। २. दुबलापन। ३. कमजोरी। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्बला :
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स्त्री० [सं० दुर्बल+टाप्] जलसिरीस का पेड़। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्बाल :
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पुं० [सं० दुर्-बाल प्रा० ब० स०] १. सिर का गंजापन। २. गंज नामक रोग। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्बुद्धि :
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वि० [सं० दुर्-बुद्धि प्रा० ब० स०] नीच या हीन बुद्धिवाला। स्त्री० दुष्ट या नीच बुद्धि। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्बोध :
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वि० [सं० दुर्-बुद्धि प्रा० ब० स०] (विषय) जिसका बोध कठिनता से हो सकता हो। जो जल्दी समझ में न आवे। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भक्ष :
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वि० [सं० दुर्√भक्ष् (खाना)+खल्] १. (पदार्थ) जिसे खाना कठिन हो। जो जल्दी न खाया जा सके। २. जो खाने में खराब या बुरा लगे। पुं० दुर्भिक्ष। अकाल। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भग :
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वि० [सं० दुर्-भग प्रा० ब० स०] [स्त्री० दुर्भगा] जिसका भाग्य बुरा हो। खराब किस्मत या प्रारब्धवाला। अभागा। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भगा :
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स्त्री० [सं० दुर्भग+टाप्] ऐसी स्त्री जो अपने पति का प्रेम या स्नेह न प्राप्त कर सकी हो। वि० सं० ‘दुर्भग’ का स्त्री०। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भर :
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वि० [सं० दुर्√भृ (भरण)+खल्] १. जिसे उठाना बहुत कठिन हो। जो सहज में उठाया न जा सके। २. भारी। वजनी। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भाग :
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पुं०=दुर्भाग्य। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भागी :
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वि० =अभागा। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भाग्य :
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पुं० [सं० दुर्-भाग्य प्रा० स०] बुरा भाग्य। खराब किस्मत। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भाव :
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पुं० [सं० दुर्-भाव प्रा० स०] १. बुरा भाव। २. किसी के प्रति मन में होनेवाला द्वेष या बुरा भाव। दुर्भावना। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भावना :
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स्त्री० [सं० दुर्-भावना प्रा० स०] १. बुरी भावना या विचार। २. आशंका। खटका। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भाव्य :
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वि० [सं० दुर√भू (होना)+ण्यत्] जो जल्दी ध्यान में न आ सके। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भृत्य :
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पुं० [सं० दुर्-भृत्य प्रा० स०] बुरा या दुष्ट नौकर। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भिक्ष :
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पुं० [सं० दुर्-भिक्षा अव्य० स०] १. ऐसा समय जिसमें भिक्षा या भोजन बहुत कठिनता से मिले। २. अकाल। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भिच्छ :
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पुं०=दुर्भिक्ष।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है) |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भिद :
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वि० [सं० दुर्√भिद् (फाड़ना)+क] जिसका भेदन कठिनता से हो सके। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भेद :
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वि० [सं० दुर्√भिद्+खल्] =दुर्भेद्य। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्भेद्य :
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वि० [सं० दुर्√भिद्+ण्यत्] १. जो जल्दी भेदा न जा सके। जो कठिनता से छिदे। २. जो जल्दी पार न किया जा सके। ३. जिसके अन्दर पहुँचना बहुत कठिन हो। जैसे—दुर्भेद्य किला। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्मंत्रणा :
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स्त्री० [सं० दुर्-मंत्रणा प्रा० स०] बुरी मंत्रणा। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्मति :
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वि० [सं० दुर्-मति प्रा० ब० स०] १. बुरी मति या बुद्धिवाला। २. खल। दुष्ट। स्त्री० [प्रा० स०] बुरी या दुष्ट बुद्धि। पुं० साठ संवत्सरों में से एक संवत्सर, जिसमें अकाल पड़ता है। (फलित ज्योतिष) |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्मद :
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वि० [सं० दुर्-मद प्रा० ब० स०] १. जो नशे में बुरी तरह से चूर हो। २. उन्मत। पागल। ३. जिसमें बहुत अधिक मद या घमंड हो। उदा०—दुंर्मद दुरस्त धर्म दस्युओं की त्रासिनी।—प्रसाद। |
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दुर्मना (नस्) :
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वि० [सं० दुर्-मानस् प्रा० ब० स०] १. बुरे चित्त या मनवाला। २. दुष्ट। पाजी। ३. उदास। खिन्न। |
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दुर्मनुष्य :
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पुं० [सं० दुर्-मनुष्य प्रा० स०] दुष्ट मनुष्य। दुर्जन। |
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दुर्मर :
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वि० [सं० दुर्-मर प्रा० ब० स०] जिसकी मृत्यु सहज में न हो। बहुत कठिनता या कष्ट से मरनेवाला। |
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दुर्मरण :
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पुं० [सं० सद्-मरण प्रा० ब० स०] बुरे प्रकार से होनेवाली मृत्यु। |
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दुर्मरा :
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स्त्री० [सं० दुर्मर+टाप्] दूर्वा। दूब। |
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दुर्मर्ष :
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वि० [सं० दुर√मृष् (सहना)+खल्] जिसे सहन करना कठिन हो। दुःसह। |
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दुर्मल्लिका :
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स्त्री० [सं०] चार अंकोंवाला एक तरह का हास्य-रस-प्रधान उपरूपक। |
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दुर्मल्ली :
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स्त्री०=दुर्मल्लिका। |
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दुर्मित्र :
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पुं० [सं० दुर्-मित्र प्रा० स०] बुरा मित्र। |
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दुर्मिल :
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वि० [सं० दुर्√मिल् (मिलना)+क] जो सहज में न मिल सके। दुष्प्राप्य। पुं० १. भरत के सातवें लड़के का नाम। २. एक प्रकार का छंद जिसके प्रत्येक चरण में १॰, ८ और १४ के विराम से, ३, २ मात्राएँ होती हैं। |
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दुर्मुख़ :
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वि० [सं० दुर्-मुख प्रा० ब० स०] १. खराब या बुरे मुँहवाला। २. कुरूप या भद्दे मुँहवाला। ३. कड़वी और बुरी बातें करने या बोलनेवाला। पुं० १. भगवान रामचन्द्र का वह गुप्तचर जो प्रजा के भीतरी समाचार उन्हें सुनाया करता था। २. रामचंद्र की सेना का एक बंदर। ३. महिषासुर के एक सेनापति का नाम। ४. धृतराष्ट्र के एक पुत्र का नाम। ५. एक नाग का नाम। ६. शिव का एक नाम। ७. साठ संवत्सरों में से एक। ८. एक यक्ष का नाम। ९. गणेश के एक गण का नाम। १॰. घोड़ा। ११. गुप्तचर। जासूस। १२. ऐसा घर या मकान जिसका दरवाजा उत्तर की ओर हो। |
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दुर्मुखी :
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स्त्री० [सं० दुर्मुख+ङीष्] एक राक्षसी जिसे रावण ने जानकी को बहकाने के लिए अशोक-वाटिका में रखा था। वि० हिं० ‘दुर्मुख’ का स्त्री०। |
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दुर्मुट :
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पुं० =दुर्मस। |
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दुर्मुस :
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पुं० [सं० दुर्+मुस=कूटना] गदा के आकार का मिट्टी, पत्थर, सड़क आदि पीटने का एक उपकरण जिसके लंबे डंडे के निचले सिरे में पत्थर का भारी गोल टुकड़ा लगा रहता है।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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दुर्मुहूर्त :
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पुं० [सं० दुर्-मुहूर्त प्रा० ब० स०] अशुभ या बुरा मुहूर्त्त। |
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दुर्मूल्य :
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वि० [सं० दुर-मूल्य प्रा० ब० स०] बहुत अधिक मूल्यवाला। बहुमूल्य। |
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दुर्मेध (धस्) :
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वि० [सं० दुर्मेधस् प्रा० ब० स०] मंद बुद्धि। नासमझ। |
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दुर्मोह :
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पुं० [सं० दुर√मुह् (मुग्ध होना)+घञ्] काकतुंडी। कौआठोंठी। |
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दुर्मोहा :
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स्त्री० [सं० दुर्मोह+टाप्] १. कौआ-ठोंठी। २. सफेद घुँघची। |
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दुर्यस (स्) :
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पुं० [सं० दुर्-यशस् प्रा० स०] बुरा यश। अपयश। |
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दुर्योध :
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वि० [सं० दुर्√युध् (लड़ना)+खल्] जिससे युद्ध करना और विजय पाना बहुत कठिन हो। |
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दुर्योधन :
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पुं० [सं० दुर्√युध्+युच्-अन] एक प्रसिद्ध कुरुवंशीय राजा जो धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ पुत्र था तथा जो महाभारत के युद्ध में मारा गया था। |
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दुर्योनि :
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वि० [सं० दुर्-योनि प्रा० ब० स०] जिसका जन्म निम्न या नीच कुल में हुआ हो। |
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दुर्रा :
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पुं० [फा०] कोड़ा। चाबुक। जैसे—मरे पर सौ बुर्रे। (कहा०) पुं० [अ० दुर्रः] बड़ा मोती। |
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दुर्रानी :
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पुं० [फा०] १. अफगानों की एक जाति। २. उक्त जाति का व्यक्ति। |
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दुर्लघ्य :
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वि० [सं० दुर्√लंघ् (लांघना)+ण्यत्] जिसे लाँघना बहुत कठिन हो। |
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दुर्लक्ष्य :
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वि० [सं० दुर्√लक्ष् (देखना)+ण्यत्] जो कठिनता से दिखाई पड़े या देखा जा सके। पुं० दुष्ट अथवा बुरा लक्ष्य या उद्देश्य। |
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दुर्लभ :
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वि० [सं० दुर्√लभ् (पाना)+खल्] १. जो कठिनता से प्राप्त होता हो। दुष्प्राप्य। २. जो बहुत कम मात्रा में, कभी-कभी अथवा कहीं-कहीं मिलता हो। (रेयर) ३. जिसके जोड़ या तरह का दूसरा जल्दी मिलता न हो। बहुत बढ़िया और अनोखा। ४. प्रिय। पुं० १. कचूर। २. विष्णु का एक नाम। |
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दुर्लभ-मुद्रा :
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स्त्री० [सं० दुर्लभा-मुद्रा कर्म० स०] आधुनिक अर्थशास्त्र में वह विदेशी मुद्रा जो कठिनाई से प्राप्त होती हो। विशेष—जब एक देश दूसरे देश को अधिक मूल्य का सामान निर्यात करता है और उस देश से कम मूल्य का सामान आयात करता है तो उसके लिए तो दूसरे देश की मुद्रा सुलभ रहती है (क्योंकि इसका उधर पावना होता है) परंतु दूसरे देश के लिए उस देश की मुद्रा दुर्लभ होती है (क्योंकि उसे पहले ही देना अधिक होता है)। |
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दुर्ललित :
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वि० [सं० दुर्√लल् (चाहना)+क्त] १. जिसका बुरी तरह से लालन या लाड़-प्यार किया गया हो और इसीलिए वह बिगड़ गया हो। २. दुष्ट। नटखट। पाजी। ३. खराब। दूषित। बुरा। उदा०—उठती अंतस्तल से सदैव दुर्ललित लालसा जो कि कांत।—प्रसाद। पुं० उद्धत या उद्दंड होने की अवस्था या भाव। उद्धतता। |
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दुर्लेख्य :
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वि० [सं० दुर्-लेख्य प्रा० स०] १. (लेख) जो खराब लिखा हुआ हो। जिसकी लिखावट बुरी हो। २. जो ऐसा लिखा हो कि जल्दी पढ़ा न जा सके। (स्मृति) पुं० वह लेख्य जो विधिक व्यवहार में अप्रामाणिक तथा विधि-विरुद्ध माना जाय। (इनवैलिड डीड) |
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दुर्वच :
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वि० [सं० दुर्√वच् (बोलना)+खल्] १. (वचन) जो सहज में न कहा जा सके। जिसे कह सकना कठिन हो। २. जिसे कहने में कष्ट हो। पुं० गाली। दुर्वचन। |
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दुर्वचन :
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पुं० [सं० दुर-वचन प्रा० स०] १. बुरा वचन। बुरी उक्ति या दूषित कथन। २. गाली। |
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दुर्वर्ण :
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वि० [सं० दुर्-वर्ण प्रा० ब० स०] बुरे या हेय वर्णवाला। पुं० १. चाँदी। रजत। २. [प्रा० स०] बुरा वर्ण। |
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दुर्वर्णा :
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स्त्री० [सं० दुर्वर्ण+टाप्] १. चाँदी। २. एलुआ नामक औषधि। |
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दुर्वह :
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वि० [सं० दुर्√वह् (ढोना)+खल्] जिसे वहन करना बहुत कठिन हो। |
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दुर्वाक (च्) :
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पुं० [सं० दुर-वाच् प्रा० स०]=दुर्वचन। |
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दुर्वाद :
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पुं० [सं० दुर्-वाद प्रा० स०] १. अपवाद। निंदा। बदनामी। २. अनुचित अथवा उपयुक्त विवाद। तकरार। हुज्जत। ३. ऐसी बात जो अच्छी होने पर भी बुरे ढंग से कही जाय। |
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दुर्वादी (दिन्) :
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वि० [सं० दुर्वाद+इनि] १. दूसरों की बदनामी करनेवाला। २. तकरार या हुज्जत करनेवाला। ३. दुर्वाद कहने वाला। |
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दुर्वार :
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वि० [सं० दुर्√वृ (वारण)+णिच्+खल्] जिसका निवारण करना कठिन हो। |
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दुर्वारि :
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पुं० [सं० दुर्-वारि=वारण प्रा० ब० स०] कंबोज देश का एक योद्धा जो महाभारत की लड़ाई में लड़ा था। |
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दुर्वार्य :
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वि० [सं० दुर्√वृ+णिच्+यत्]=दुर्वार। (देखें) |
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दुर्वासना :
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स्त्री० [सं० दुर्-वासना प्रा० स०] १. बुरी इच्छा, कामना या वासना। २. ऐसी कामना या वासना जो कभी अथवा जल्दी पूरी न हो सके। |
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दुर्वासा (सस्) :
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पुं० [सं० दुर-वासस् प्रा० ब० स०] अत्रि और अनुसूया के पुत्र एक प्रसिद्ध ऋषि जो बहुत ही क्रोधी स्वभाव के थे और जराजरा-सी बात पर शाप दे बैठते थे। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्वाहित :
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वि० [सं० दुर्-वाहित प्रा० स०] जिसका वहन करना बहुत मुश्किल हो। पुं० भारी बोझ। |
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दुर्विगार :
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वि० [सं० दुर्-वि√गाह् (थाह लेना)+खल्] जिसका अवगाहन करना अर्थात् थाह पाना बहुत कठिन हो। |
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दुर्विज्ञेय :
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वि० [सं० दुर्-वि√ज्ञा (जानना)+यत्] जिसका ज्ञान प्राप्त करना बहुत कठिन हो। जिसे जल्दी जान न सकें। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विद :
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वि० [सं० दुर्√विद् (जानना)+क] जिसे जानना तथा समझना बहुत कठिन हो। |
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दुर्विदग्ध :
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वि० [सं० दुर्-विदग्ध प्रा० स०] १. जो अच्छी तरह जला न हो। अधजला। २. जो पूरी तरह से पका न हो। ३. अभिमानी। घमंडी। |
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दुर्विदग्धता :
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स्त्री० [सं० दुर्विदग्ध तल—टाप्] दुर्विदग्ध होने की अवस्था या भाव। पूरी निपुणता का अभाव। अधकचरापन। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विध :
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वि० [सं० दुर्-विधा प्रा० ब० स०] १. दरिद्र। धन-हीन। २. खल। दुष्ट। ३. बेवकूफ। मूर्ख। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विधि :
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स्त्री० [सं० दुर्-विधि प्रा० स०] खराब या बुरी विधि। दूषित या बुरा ढंग या रीति। पुं० दुर्भाग्य। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विनय :
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वि० [सं० दुर्-विनय प्रा० ब० स०] १. जिसमें विनय का अभाव हो। २. उद्दंड। स्त्री० [प्रा० स०] १. अविनय। २. उद्दंडता। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विनीत :
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वि० [सं० दुर्-विनीत प्रा० स०] जो विनीत न हो। अवनीत। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विपाक :
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पुं० [सं० दुर्-विपाक प्रा० स०] १. बुरा परिणाम। बुरा फल। २. बुरा संयोग। जैसे—दैव दुर्विपाक से उन्हें पुत्र-शोक सहना पड़ा। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विभाव्य :
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वि० [सं० दुर्वि√भू (होना)+ण्यत्] जिसका अनुमान कठिनता से हो सके। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विलास :
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पुं० [सं० दुर्-विलास प्रा० स०] भाग्य का विपरीत होना। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विवाह :
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पुं० [सं० दुर्-विवाह प्रा० स०] बुरा या निंदनीय विवाह। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्विष :
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वि० [सं० दुर्-विष प्रा० ब० स०] दुराशय। पुं० महादेव। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्विषह :
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वि० [सं० दुर्-वि√सह (सहना)√खल्] जिसे सहना बहुत कठिन हो। दुःसह। पुं० १. महादेव। शिव। २. धृतराष्ट्र के एक पुत्र का नाम। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्वृत्त :
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वि० [सं० दुर्-वृत्त प्रा० ब० स०] [भाव० दुर्वृत्ति] १. जिसका आचरण बुरा हो। दुश्चरित्र। दुराचारी। २. जो दूषित या निंदनीय उपायों से जीविका चलाता हो। बुरी वृत्तिवाला। पुं० [प्रा० स०] निन्दनीय और बुरा आचरण। बद-चलनी। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्वृत्त-फलक :
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पुं० [ष० त०] दे० ‘इति-वृत्तक’। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्वृत्ति :
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स्त्री० [सं० दुर-वृत्ति प्रा० स०] १. बुरी वृत्ति। २. बुरा आचरण या स्वभाव। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्वृष्टि :
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स्त्री० [सं० दुर्-वृष्टि प्रा० स०] १. आवश्यक या उचित से कम वृष्टि। २. अनावृष्टि। सूखा। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्वेद :
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वि [सं० दुर्√विद् (जानना)+खल्] १. जिसे समझना बहुत कठिन हो। २. जो वेदों का अध्ययन न करता हो। ३. वेदों की निंदा करनेवाला। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्व्यवस्था :
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स्त्री० [सं० दुर्-व्यवस्था प्रा० स०] खराब या बुरी व्यवस्था। अव्यवस्था। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्व्यवहार :
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पुं० [सं० दुर्-व्यवहार प्रा० स०] १. अनुचित और बुरा व्यवहार। बुरा बरताव। २. अनुचित या बुरा आचरण। ३. ऐसा व्यवहार या मुकदमा जिसका फैसला (अनुचित प्रभाव, घूस आदि के कारण) ठीक न हुआ हो। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्व्यसन :
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पुं० [सं० दुर्-व्यसन प्रा० स०] कोई बुरा या दूषित काम करने का चस्का जो बहुत कठिनता से छूट सके। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्व्यसनी (निन्) :
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वि० [दुव्यर्यसन+इनि] जिसे किसी प्रकार का दुर्व्यसन हो। जिसे बुरी तरह से कोई लत या कई लतें लगी हों। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्व्रत :
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वि० [सं० दु्र-व्रत प्रा० ब० स०] जिसने कोई अनुचित या बुरा व्रत लिया हो। बुरे मनोरथों वाला। नीचाशय। पुं० [प्रा० स०] निन्दनीय, नीच अथवा बुरा आशय, मनोरथ या व्रत। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्हृद् :
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वि० [सं० दुर्-हृदय प्रा० ब० स०] जो सुहृद् न हो। बुरे हृदयवाला। पुं० विरोधी या शत्रु। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्हृदय :
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वि० [सं० दुर्-हृदय प्रा० ब० स०] खोटे हृदयवाला। कपटी। |
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समानार्थी शब्द-
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दुर्हृषीक :
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वि० [सं० दुर्-हृषीक प्रा० ब० स०] जिसकी ज्ञानेंद्रियों में कुछ खराबी या विकार हो। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
दुर्वा-क्षेत्र :
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पुं० [ष० त०] १. वह क्षेत्र जिसमें दूब होती हो। २. खेल का वह मैदान जिसमें छोटी-छोटी घास लगी हुई हो। (लान) |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |