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उपन्यास >> सुमति

सुमति

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :265
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 7598

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बुद्धि ऐसा यंत्र है जो मनुष्य को उन समस्याओं को सुलझाने के लिए मिला है, जिनमें प्रमाण और अनुभव नहीं होता।

9

बच्चों के नाम रखे गये तो नलिनी के बच्चे का नाम रघुवीर और सुमति के बच्चे का नाम सुमन रखा गया। इस नामकरण-संस्कार के बाद डॉ० सुदर्शन का यह प्रस्ताव था कि दोनों बच्चों की देखभाल के लिए एक नौकरानी रख ली जाए। तदनुसार राधा नाम की एक वृद्धा विधवा इस काम के लिए ढूँढ़ ली गई।

‘‘और हम दोनों क्या करे?’’ सुमति ने प्रश्न किया।

उसका उत्तर दिया सुदर्शन की माँ ने ‘‘नलिनी बेटी के विषय में तो मैं जानती नहीं कि वह क्या करे और क्या कर सकती है। परन्तु सुमति! तुम्हें तो अपने कार्य का ज्ञान होना चाहिए।’’

‘‘मैं समझती हूँ कि मैं अपना कार्य कर रही हूँ। किन्तु उससे ये मुझे वंचित कर रहे हैं।’’

‘‘क्या कार्य कर रही हो?’’

‘‘बच्चे का पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा।’’

‘‘यह तो होगा ही। अब तुमको बच्चे के लिए पृथक् कमरे में सोने की आवश्यकता नहीं। रात के समय बच्चे की देश-भाल के लिए राधा आ गई है। सुमन ने उसे पसन्द भी कर लिया है। रघुवीर भी उसके पास ही सोया करेगा।’’

‘‘मेरा मन नहीं मानता।’’

‘‘किस बात के लिए नहीं मानता?’’

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