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उपन्यास >> धरती और धन धरती और धनगुरुदत्त
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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती। इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।
‘‘नहीं; मुझको तो केवल यह बताया है कि उनकी लड़की इनकी तिजोरी में से रुपया और आभूषण चुरा कर ले गई है।’’
‘‘तो सुनिये ! लाला करोड़ीमल की लड़की भगेरिया साहब की पत्नी है। यूरोप जाते समय वे अपने सेफ की चाबी अपनी पत्नी के पास छोड़ गये थे। वे अपने माता-पिता का विश्वास नहीं करते थे। उनकी पत्नी का कहना है कि चोरी उसने नहीं की। वह नहीं जानती कि किसने की है।’’
‘‘तो आप उनकी पत्नी को जानते हैं?’’
‘‘जी हाँ। उनकी पत्नी की छोटी बहिन की सगाई मेरे बड़े भाई के साथ हो चुकी है।’’
‘‘तब तो आप भली-भाँति जानते होंगे कि उनकी पत्नी कैसी है?’’
‘‘कैसी का क्या मतलब?’’
‘‘मेरा मतलब है कि क्या वह चोर प्रतीत होती है?’’
‘‘मैं तो इतना जानता हूँ कि उसका पिता भगेरिया से अधिक धनी है। लड़कियाँ सीधी और सरल स्वभाव की है, शेष मैं कुछ नहीं जानता।’’
‘‘परन्तु मिस्टर भगेरिया ने मुझे कभी भी नहीं बताया कि उनका पहले भी कोई विवाह हुआ है। मैंने भी पूछा नहीं। मुझको सन्देह करने का कोई कारण प्रतीत नहीं हुआ। आज पहले दिन मैं यह सुन रही हूँ कि मेरे साथ उनकी दूसरी शादी होगी।’’
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