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उपन्यास >> धरती और धन

धरती और धन

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :195
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 7640

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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती।  इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।


‘‘जी नहीं। पीने को तबीयत नहीं की।’’

‘‘चलिए पिएँगे।’’

बिहारीलाल इसका अर्थ नहीं समझ सका। वह मुख देखता हुआ खड़ा रहा। इसपर सूसन ने कहा, ‘‘आज मिस्टर भगेरिया के घर पर चोरी हो गई है और वे पुलिस की सहायता से उस चोरी का माल बरामद करने का यत्न कर रहे हैं। वह घर पर चाय लेने नहीं आये। मैंने समझा कि यदि आप मिल जायेंगे तो चाय का आनन्द आ जायेगा।’’

चोरी की बात सुन बिहारीलाल के कान खड़े हो गये। उसको सन्देह हो गया कि यह चोरी तिजोरी में से गये माल के विषय में है। इस कारण उसको इसके विषय में और अधिक जानने की लालसा जाग पड़ी और वह सूसन के साथ चाय पीने के लिए चल पड़ा।

आज वे ताज में नहीं गये। मैरीन ड्राइव पर एक रैस्टोराँ में जाकर चाय का आर्डर दे दिया। जब दोनों चाय की प्रतीक्षा कर रहे थे, तो सूसन ने बताया, ‘‘मिस्टर भगेरिया को सन्देह है कि उनकी चोरी किसी करोड़ीमल की लड़की ने की है और वे पुलिस की सहायता से उनके घर की तलाशी कराने गये हैं।’’

‘‘बिहारीलाल को इस तलाशी की बात सुनकर भारी दुःख हुआ। वह अन्यमनस्क भाव में सूसन का मुख देखता रहा। इसपर सूसन ने पूछा, ‘‘क्या विचार कर रहे हैं? क्या आप इस करोड़ीमल को जानते हैं? इनका करोड़ीमल की लड़की से क्या सम्बन्ध है?’’

‘‘तो उन्होंने आपको बताया नहीं?’’

‘‘क्या बताया नहीं?’’

‘‘यही कि करोड़ीमल के घर में उनका रुपया कैसे चला गया।’’

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