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उपन्यास >> धरती और धन धरती और धनगुरुदत्त
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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती। इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।
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ललिता की बात मानी गई। जब्बलपुर वालों को, सेठ को जवाब देना पड़ा। यद्यपि फकीरचन्द राजी नहीं हुआ था, तो भी बिहारीलाल के आश्वासन को पर्याप्त मान अभी तो व्रत तोड़ ही दिया गया था। इसके पश्चात् डॉक्टर की राय से भोजन-व्यवस्था की गई और पन्द्रह दिन में ललिता, शकुन्तला और उनकी माँ स्वस्थ हो अपने नियमित जीवन-यापन में लग गईं।
बिहारीलाल परीक्षा में संलग्न होने के कारण न तो सूसन से ही मिलने जा सका और न ही ललिता इत्यादि का पता कर सका।
सूसन प्रायः नित्य शकुन्तला से मिलने आती थी। एक दिन रामचन्द्र ने सूसन से पूछ लिया, ‘‘आप यहाँ क्यों आती हैं?’’
‘‘ललिता से मिलने के लिए। वह मेरी सहेली है।’’
‘‘आपका सुन्दरलाल से क्या सम्बन्ध है?’’
‘‘कैसे जानते हो कि भैया मेरा उनसे कोई सम्बन्ध है?’’
‘‘देखिये जी, मेरी दृष्टि अभी दुर्बल नहीं हुई। मैंने आपको कई बार सुन्दरलाल के साथ चौपाटी पर घूमते देखा है। उसका आपकी बाँह में बाँह डालकर सर्वसाधारण में घूमना एक ही बात का सूचक हो सकता है कि आप उसकी रखैल है।’’
‘‘नहीं, मैं उनकी पत्नी हूँ।’’
रामचन्द्र ने कहा, ‘‘यह बात अब विख्यात हो चुकी है कि सुन्दरलाल फ्रांस से किसी लड़की को यहाँ लाया है और उसको मैरीन ड्राइव पर डेढ़ लाख का एक मकान लेकर रखे हुए है। तो आप वही है?’’
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