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उपन्यास >> धरती और धन धरती और धनगुरुदत्त
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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती। इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।
सूर्यकान्त इस प्रकार की बात से डरता था। उसने कहा, ‘‘मैं चाहता हूँ कि उस बात का विचार छोड़कर आप निर्वाचन में मुझको प्रधान बनाने का यत्न करें। मैं तो अभी भी समझता हूँ कि ठीक ढँग से काम किया गया, तो मजदूर समझ जाएँगे और वे मेरी सेवाओं का प्रतिकार देंगे।’’
अगले दिन से फकीरचन्द के कर्मचारियों में सूर्यकान्त का प्रचार आरम्भ हुआ। वे लोग, जो बिहारीलाल ने संगठित किए थे, स्पष्ट रूप से कह रहे थे कि सूर्यकान्त एक बाहरी आदमी है। वह मोतीराम का मित्र है और मोतीराम सेठ करोड़ीमल का नौकर है। सेठ करोड़ीमल ने फकीरचन्द के साथ भारी धोखा किया था और अब भी मोतीराम और सूर्यकान्त फकीरचन्द को हानि पहुँचाने के लिए यह यूनियन बनवा रहे हैं।
यूनियन रहेगी तो केवल मजदूरों के हित के लिए रहेगी। वह किसी सेठ-साहूकार के संकेतों पर काम नहीं करेगी। हमको बाबू फकीरचन्द से किसी प्रकार का गिला नहीं। वह हमको अधिक वेतन देता है, इस कारण इस यूनियन का यह उद्देश्य नहीं कि फकीरचन्द को हानि पहुँचाई जाए।
दूसरी ओर के लोग कहते थे कि फकीरचन्द के भाई बिहारीलाल ने मजदूरों को बर्गला रखा है और वास्तव में वही है, जो फकीरचन्द की प्रशंसा करवाता रहता है। हम लोग आठ घण्टे काम करते हैं, तब कहीं हमको बीस रुपये मासिक दिया जाता है। फकीरचन्द हम पर किसी प्रकार का उपकार नहीं करता।
इस प्रकार दोनों ओर से गरमागरम वाद-विवाद हो रहा था। गिरधारी सूर्यकान्त का प्रबल समर्थन था।
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