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उपन्यास >> धरती और धन

धरती और धन

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :195
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 7640

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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती।  इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।


सुन्दरलाल ने बिहारीलाल के समीप बैठते हुए कहा, ‘‘हाँ, मैं...क्या मेरे आने से आपके इस मधुर मिलन में बाधा पड़ गई है?’’ इतना कहते हुए सुन्दरलाल ने अर्थ-भरी दृष्टि से बिहारीलाल की ओर देखा।

बिहारीलाल समझ गया कि सुन्दरलाल शकुन्तला से झगड़ा करने के विचार से आया है। इस कारण वह संकोच अनुभव करने लगा। पन्नादेवी ने बात बना ली। उसने ललिता को कहा, ‘‘ललिता ! बिहारी को खाने के कमरे में ले जाकर भोजन करा दो।’’

ललिता समझ गई और बिहारीलाल को खाने के कमरे में ले गई।

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