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उपन्यास >> धरती और धन

धरती और धन

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :195
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 7640

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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती।  इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।


पश्चात् उसने पुलिस में कहकर और पुलिस मैजिस्ट्रेट को भारी रिश्वत देकर करोड़ीमल के घर की तलाशी करा दी। उसको यह बात विदित थी कि चोरी का माल बरामद नहीं होगा, परन्तु इसके करोड़ीमल की भारी बदनामी हो जायेगी और वह समझता था कि इससे उसका श्वसुर और पत्नी उससे सम्बन्ध तोड़ देंगे।

ऐसा ही हुआ। करोड़ीमल और शकुन्तला ने समझ लिया कि सुन्दरलाल उनके लिए अब जीवित नहीं है और अब उनका उससे सम्बन्ध नहीं रह सकता। करोड़ीमल ने तो यहाँ तक निश्चय कर लिया था कि वह शकुन्तला के नाम कई लाख रुपये की सम्पत्ति लिख देगा, जिससे उसका जीवन-निर्वाह सुगमता से हो सके।

जब सुन्दरलाल ने समझा कि अब शकुन्तला से छुट्टी मिल गई है, तो उसने अपने पिता से कौमिल्ला सूसन का उल्लेख कर दिया। उसने कहा, ‘‘पिताजी ! मैं समझता हूँ कि अब मेरा शकुन्तला से पीछा छूट गया है। अब मैं अपने को स्वतन्त्र समझता हूँ कि नया विवाह कर सकूँ।’’

‘‘ठीक है बेटा ! तो ऐसा करो कि तुम दिल्ली चले जाओ। वहाँ नीलश्याम सोमानी एक बहुत बड़े रईस हैं। उनका सन्देश कई बार आ चुका है। मैं तुमको एक पत्र दे देता हूँ। वहाँ जाकर तुम लड़की भी देख आना और लेन-देन की बात भी कर आना।’’

‘‘तो आपने उनको लिखा है?’’

‘‘हाँ, मैंने लिखा था कि लड़का विलायत सैर करने गया हुआ है। वह आयेगा, तो मैं उसको दिल्ली भेज दूँगा। सो अब तुम चले जाओ।’’

‘‘पर पिताजी ! वहाँ जाने से पूर्व एक रिश्ता तो यहाँ ही है। उसके विषय में आप विचार कर लें।’’

‘‘किसकी लड़की है वह?’’

‘‘फ्रांस के शैम्पेन जिले में वैडविले नामक गाँव में एक बड़े जमींदार की लड़की है। नाम है कौमिल्ला सूसन। मैं उसको केवल सूसन के नाम से पुकारता हूँ।’’

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