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उपन्यास >> धरती और धन धरती और धनगुरुदत्त
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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती। इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।
‘‘वह नालायक का बच्चा एक रखैल को पत्नी बनाना चाहता है।’’
‘‘तो क्या हानि है इसमे?’’
‘‘देखो जी !’’ सेठ ने सामने एक कुर्सी पर बैठते हुए कहा, लड़के को अपने वश में रखना मेरा काम है। मैं उसको इन तितलियों पर अपनी सम्पत्ति निछावर नहीं करने दूँगा।’’
‘‘देखिये सेठजी ! मैं आपको एक बात बताता हूँ। आपका लड़का अभी यहाँ आया था। वास्तव में वह मेरे पास ही बैठा था, जब आपका टेलीफोन आया। इसी कारण मैंने उस समय फोन पर बातचीत करनी उचित नहीं समझी।
‘‘वह मुझको एक कॉन्ट्रैक्ट लिखने के लिए दे गया है। वह चाहता है कि उस कॉन्ट्रैक्ट से मिस कौमिल्ला सूसन को पाँच हजार रुपये मासिक खर्चे के लिए दे। रहने को मकान दे और यदि उसके कोई सन्तान हो जाये तो प्रत्येक बच्चे को पाँच सौ रुपये मासिक देने का वचन दें।’’
मैंने उसको बताया है कि वह इस प्रकार का कोई कॉन्ट्रैक्ट लिख नहीं सकता, जबतक कि उस कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए किसी जायदाद की जमानत भी साथ न हो।’’
‘‘इसपर उसने दो-तीन फैक्ट्रियों के नाम लिखाने की इच्छा प्रकट की, परन्तु मैंने कहा कि वे फैक्ट्रियाँ तो उसके नाम हैं नहीं। यदि उनको करार-पत्र में लिखायेगा तो झूठ बोलने के अपराध में दण्ड का भागी हो जायेगा।’’
‘‘इसपर वह बहुत ही परेशान प्रतीत होता था। मैंने उसको राय दी है कि वह आपको कहकर कम-से-कम दस लाख रुपये की सम्पत्ति अपने नाम लिखा ले, तभी वह इस प्रकार का करारनामा लिख सकता है। वह आपसे झगड़ा करके इस प्रकार का करार-पत्र लिखाने गया है।’’
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