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उपन्यास >> धरती और धन

धरती और धन

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :195
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 7640

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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती।  इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।


बात यहीं रुक गई। हॉल में अँधेरा हो गया और ‘मिकी माऊस’ का कार्टून दिखाया जाने लगा। उसने देखा कि उसकी सास उस कार्टून मंस बहुत दिलचस्पी ले रही है।

मुख्य चित्र आरम्भ होने से पहले ही सुन्दरलाल आ गया। वह अपने माता-पिता के आगे से होकर सूसन के दूसरी ओर बैठ गया। अँधेरे में सेठ सेठानी ने उसकी नहीं पहचाना। इस समय सूसन ने सुन्दरलाल के कान में कह दिया, ‘‘यह देखिये, मेरी बगल में कौन बैठा है?’’

इस समय मुख्य चित्र आरम्भ हो गया। पर्दे से लौटे हुए प्रकाश में सुन्दरलाल ने सूसन की बगल में बैठी औरत को ध्यान से देखा। वह पहचान गया और उसने सूसन के कान में ही पूछा, ‘‘तुम कैसे जान गई हो इनको?’’

‘‘यह एक लम्बी बात है। अब क्या करोगे?’’

‘‘तुम्हारा परिचय करा दूँगा। क्या समझती हो?’’

‘‘ठीक है, करा दीजिये।’’

ऐसा ही हुआ। मध्याह्नोतर के समय, जब प्रकाश हुआ तो सुन्दरलाल ने अपने स्थान से उठकर, पिता के सामने आकर कहा, ‘‘पिताजी ! यह देखिये। यह है मेरी नवीन पत्नी कोमिल्ला सूसन।

‘‘सूसन ! ये हैं मेरे माता-पिता। इनसे शेक-हैण्ड करो।’’

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