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उपन्यास >> धरती और धन धरती और धनगुरुदत्त
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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती। इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।
‘‘यों तो सब ठीक है, परन्तु इन लोगों का प्रत्येक समस्या को सुलझने का ढँग विलक्षण है। इससे सदा मन में भय बना रहता है।’’
इस समय बैरा चाय का सामान ले आया और तीनों चाय पीने लगीं। एकाएक शकुन्तला को कुछ याद आया तो उसने चाय का प्याला सॉसर में रखकर कहा, ‘‘एक और गडबड़ प्रतीत होती है। दो दिन से पुलिस सेठजी का बयान लेने आ रही है। कल हमको पता
चला था कि मोतीराम पकड़ा गया है और आज सेठजी उसको जमानत पर छुड़ा लाये हैं। इस सब अस्वाभाविक बातों का कारण हम नहीं जान सकीं।’’
‘‘यह सब बात बिहारीलाल को बतानी चाहिए। मैं तो यही कहूँगी कि वह अपने भाई को यह सारा विवरण लिख दे।’’
‘‘बात ऐसी प्रतीत होती है कि फकीरचन्द ने पुलिस में चोरी की रिपोर्ट लिखाई होगी। स्वाभाविक रूप में मोतीराम की तलाशी हुई होगी। पुलिस उसको बम्बई में पकड़ पाई है।
सेठजी ने उसको छुड़ाया तो इससे पुलिस वालों को सेठजी पर सन्देह हो गया होगा और सेठजी के भी बयान हुए होंगे।
‘‘हम नहीं चाहती थीं कि परीक्षा के दिनों में उसके मस्तिष्क में किसी प्रकार की हलचल मचाएँ।’’
‘‘इस पर भी उसको यहाँ की स्थिति बताकर, कह देना चाहिए कि वह अपने भाई को लिख दे।’’
‘‘तो सूसन बहिन ! तुम उससे मिलकर यह सूचना दे दो।’’
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