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उपन्यास >> धरती और धन धरती और धनगुरुदत्त
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बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती। इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।
‘‘यह सब मैंने पुलिस को बता दिया। मोतीराम पर मुकद्दमा बनाया गया। लक्ष्मीधर के बयानों से बम्बई में तहकीकात होने लगी और वहाँ मोतीराम पकड़ लिया गया।
‘‘मुझे यह मालूम हो गया है कि मोतीराम की जमानत सेठजी ने दी है और उन्होंने अपने बयान में कहा है कि रुपया उनको मिलता रहा है। इससे मुझपर झूठी रिपोर्ट लिखाने का मुकद्दमा बन गया। बहुत कठिनाई से मैं इस मुकद्दमे से बच सका हूँ।
‘‘मुझे यह कहा गया है कि मैं सेठजी पर हर्जाने का दावा कर सकता हूँ। परन्तु मैं यह कुछ भी नहीं कर रहा। कारण यह है कि पहले ही इस झगड़े में मेरा बहुत-सा समय नष्ट हो चुका है। कुछ रुपया भी व्यय हुआ है। मैं अपना समय, इस प्रकार बेहूदा आदमी से झगड़ा कर, नष्ट करना नहीं चाहता।’’
‘‘तुम्हारी परीक्षा कब हो रही है और देवगढ़ कब आ रहे हो?’’
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